"राम"
कण कणमें वसियो राम, किन किन स्थान बताऊं! सीताजी का स्वामी कहूं की, तुलसी जी का नाथ, या, कहूं क्रौंच के मुख से, निकल्यो शबद राम! दशरथने जब बाण चलाया, मुख से निकल्यों राम, श्रवण के वे मातपिता का, क्या समजू वही राम? राम नाम से पत्थर तैरे, तैरा भगत चंद्र। मिला जीवन तो रट लो तुम, बस एक ही शबद राम। #बापू_उवाच(६.१९.२४)